यह सफर नहीं आसान…
कभी हम आपके पास चले आते है तो कभी आप हमारे पास….
लगता तो है की यह दूरियां घटती जा रही हैं… पर जैसे कहा ना मुस्किल है यह सफर …. यह रास्ता हमे मिलने ही नहीं देता है।
फिर भी हम चलते जा रहे है, इक आसा कि किरण हाथ में थामे हुए
की एक दिन तो ऐसा आएगा की हम एक हो जायेंगे.. जैसे ढलता हुआ सूरज इन पहाड़ों में।
छमछमती हुई इन नदियां समुंदरो में।
यह सफर नहीं हैं आसान जब तक हम इसे आसान न बनाए।
~गुमनाम सा मैं
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नदी किनारे !🙂
हवाएं के साथ वह जाने का मन तो करता है
इन नदियों में गोते लगाने का जी तो करता हैं
आशाएं तो बहत है पूरे करने को
दुनियां की यह भीड़ में खुद को ढूंढने को
लेकिन हमेशा गिरने के बाद हौसला ही साथ खड़ा पाते है।
बीते हुए कल की अंधेरों में खोए रहते है और उम्मीदें रहता है आने वाला कल की। इन सब में आज कब निकल जाता है पता है नहीं चलता ।
हर वो एक चीज जिसे हमने पूरे लगन से चहा है वह सब्र से नहीं मिलता कुछ के लिए बेसबर होना पड़ता है !
