हवाएं के साथ वह जाने का मन तो करता है
इन नदियों में गोते लगाने का जी तो करता हैं
आशाएं तो बहत है पूरे करने को
दुनियां की यह भीड़ में खुद को ढूंढने को
लेकिन हमेशा गिरने के बाद हौसला ही साथ खड़ा पाते है।
बीते हुए कल की अंधेरों में खोए रहते है और उम्मीदें रहता है आने वाला कल की। इन सब में आज कब निकल जाता है पता है नहीं चलता ।
हर वो एक चीज जिसे हमने पूरे लगन से चहा है वह सब्र से नहीं मिलता कुछ के लिए बेसबर होना पड़ता है !

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